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चंद्रपूर,(वि. प्र.) – श्रीराम कथा सेवा समिति द्वारा आयोजित रामकथा के छठवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक राजन महाराज जी ने सीताराम-सीताराम भजन से कथा का प्रारंभ किया ततपश्चात स्वयंवर पर कहा कि विश्वामित्र के आज्ञा पाकर श्री राम ने स्वयंवर के लिए रखा पिनाक नाम के धनुष को जिन्हें हजारों राजाओं ने एक साथ मिलकर बहिनहिला नहीं सका था, उन्हें सहज रूप से उठाया और कद्दू के समान तोड़ दिया।
इससे इतना तेज आवाज हुआ कि तीनों लोकों में सुनाई दिया। कोसों दूर बैठे श्रीपरशुराम को आवाज सुनाई दिया तो वे समझ गए कि शंकर जी का पिनाक टुटा है। गुस्से में श्रीपरशुराम वहाँ पहुंचे और पूछने लगे कि किसने पिनाक तोड़ा है। जल्द बताओं अन्यथा सबको एक साथ तोड़ देंगे।
श्रीपरशुराम लक्ष्मण सवांद
लक्ष्मण ने बताया कि भैया श्रीराम को छूते ही पिनाक टूट गया। धनुष तो टूटते रहते हैं इसमें इतना क्रोध होने की क्या जरूरत है? श्रीपरशुरामजी और क्रोधित हो गए। अबतक तुझे बालक समझकर छोड़ दे रहा था। आओ युध्द करो। लक्ष्मण ने कहा- सन्त, गऊ, ब्राह्मण और भगवान से युद्ध नही करते हैं। हारे तो हारे और जीत गए तो भी पाप लगेगा। दोनों में मेरा ही नुकसान है।
श्रीपरशुराम जी को पता चला कि श्रीराम भगवान है, उन्होंने नौ बार जयकारा लगाया। उसके बाद महेंद्रगिरि पर्वत पर तपस्या करने चले गए।
महाराज जी ने प्यारा भजन गाया – सीताराम-सीताराम-सीताराम कहिए, जाहिं विधि राखे राम ताहि विधि रहिए, तब श्रद्धालुओं खूब झूमें।
मिथिला के दूत अयोध्या पहुंच कर राजा दशरथ को सारी जानकारी देता है। दूत ने बताया कि महाराज आपके पुत्र श्रीराम के कुशल के बारे क्या बताये, उनके वहां पहुंचने पर पूरे मिथिला को कुशल कर दिये।
श्रीराम की शादी का शुभ मुहूर्त निकाला गया। अगहन शुक्ल पक्ष पंचमी दिन मंगलवार तय हुआ।जब राम जी की बारात निकली तो देवताओं की गुरु बृहस्पति और इंद्र भगवान नीचे उतर आए। अन्य देवी देवताओं भी पहुंचें। अयोध्या से मिथिला बाराती जाने में चार दिन का समय लगा है। लोंगों में चर्चा कि राजा जनक और राजा दशरथ से भाग्यशाली दुनिया मे कोई नहीं है।
सभी देवी देवताओं शादी में पहुंचें है। विधिवत कार्यक्रम और मंत्रोचारण पश्चात सिंदूर दान हुआ। मंगल गीत से पूरा जनक नगरी गूंज रहा था।
धरती पर जितनी नदियां है सभी के सभी संमुद्र में मिलती है। श्रीराम के धनुष का नाम कोदंड था और उससे निकला अमोघ वाण कभी भी लक्ष्य से विचलित नहीं होता था। जब आप श्रेष्ठ के साथ है तब आपका मान न अपमान होता है।
पंडाल के दोनों तरफ धार्मिक चित्र और चौपाई लिखा बैनर लगा है। जिला पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन,चन्दन सिंह चन्देल सहित दर्जनों गणमान्यों श्रीराम कथा को भेंट दी। कथा पश्चात आरती हुआ। जिसमें सर्व समाज को आमंत्रित किया गया। 

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