प्रेम के तीन प्रकार राग, अनुराग और वैराग्य.
शंकर तेरी जटा में बहती है गंगा धारा.
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चंद्रपूर, (वि. प्र.) – सुप्रसिद्ध श्रीराम कथाकार राजन महाराज के मधुर वाणियों द्वारा दूसरे दिन गुरुवार को शिव पार्वती विवाह कथा के आरंभ कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भगवान शिव की स्तुति से हुआ।
कलश, फूल, गुलदस्ते से सजे भव्य और खूबसूरत व्यास पीठ से राजन महाराज ने हजारों श्रद्धालुओं के बीच कथा सुनाते हुए कहा कि प्रेम तीन प्रकार के होते हैं। पहला राग जो घर परिवार के साथ होता है। दूसरा अनुराग जो भगवान के साथ किया जाता है और तीसरा वैराग्य जो मोह से मोक्ष मार्ग की ओर ले जाता है।
भागवान का याद करने का जो उपाय बनाता है उसे चतुर व्यक्ति कहते हैं न कि ठगने वाला चतुर होता है। अगस्त मुन्नी सभी पहाड़ों के गुरु है। स्वरूप बना सकते हैं स्वभाव नहीं बनाया जा सकता है।
87000 वर्ष तक रहें समाधिस्थ
राजन महाराज ने एक प्रसंग में बताया कि सीता हरण के पश्चात विलाप करते हुए श्रीराम जंगल में इधर उधर भटक रहे थे तभी आकाश मार्ग से भगवान शिव भ्रमण करते हुए श्रीराम को देखा तो उन्हें करबद्ध प्रणाम किया। साथ में ही भ्रमण कर रही माँ सती को यह अच्छा नहीं लगा। माँ सती ने सत्य जानने के लिए सीता माँ के रूप व भेष बनाकर श्री राम के आगे चलने लगी। माँ पार्वती को यह ध्यान में नहीं रहा कि सीता माँ हमेशा रामजी के पीछे चला करती है। श्रीराम ने तुरन्त उन्हें पहचानते हए अभिवादन किया और पूछा कि माँ अकेले-अकेले घूम रही है,बाबा कहाँ है? तब उन्हें भूल का अहसास हुआ कि अज्ञानता के कारण पति पर विस्वास नहीं किया। भगवान शंकर ने पत्नी सती को सीता माँ के रूप में देखा तो उन्हें पत्नी के रूप से त्याग कर दिया और कैलाश पर्वत पर जाकर 87000 वर्ष तक समाधिस्थ रहें।
पिता, सद्गुरु, मित्र और स्वामी के घर के लिए निमंत्रण का इंतजार नहीं करना चाहिए। लेकिन वही जान बूझकर नहीं बुलाया गया हो तो बिल्कुल नहीं जाना चाहिए। माँ सती ने अपने पिता दक्ष के यहाँ हो रहे यज्ञ आयोजन में जान बूझकर नहीं बुलाने के बाद भी चली गई। वहाँ वे स्वयं का अपमान को बर्दाश्त कर ली परन्तु अपने पिता द्वारा पति शंकर को यज्ञ में नहीं बुलाने पर जो अपमानित महसूस की, वे बर्दास्त नहीं कर पाई और आवेश में आकर भष्म हो गई। गुस्से में आकर भगवान शंकर के गण वीरभद्र ने दक्ष को गर्दन काटकर अग्नि कुंड में डाल दिया। बाद में देवताओं के अनुरोध पर भगवान शंकर ने दक्ष के धड़ के साथ एक बकरे की गर्दन जोड़कर पुनर्जीवित किया ।
बारात में सियार कुते भूत पिसाच
भष्म हुई सती ने मैना और हिमालय के घर बेटी स्वरूप जन्म ली। बड़ी होने पर नारद जी ने भगवान शंकर से उनकी शादी तय करवाई। महाराज ने सरल भाषा में भगवान शंकर की बाराती और शादी का कथा इस प्रकार सुनाई की श्रद्धालुओं ने खूब ठहाका लगाया। शंकर भगवान का सिर पर साँपों से सजा सेहरा, कुत्ता, बिल्ली, सियार, भूत पिसाच बाराती को देखकर गांवों वालों घर में छिप गए और घरवालों में मातम की स्थिति बन गई। जैसे तैसे कर पार्वती ने अपनी मां मैना को समझाया कि जो लिखा रहता है वही होता है माँ, व्यर्थ की कलंक की भागी बनेंगी। पश्चात शादी की सभी रश्मरिवाज निभाई गई।
भजन- शंकर तेरी जटा में बहती है गंगाधारा, काली घटा के अंदर जिम दामिनी उजारा.
राम कथा कार्यक्रम को भेंट देने जिले के पालकमंत्री डॉ.अशोक उइके और गडचिरोली के पूर्व सांसद अशोक नेते पहुँचे। श्रीराम कथा सेवा समिति द्वारा कराया जा रहा संगीतमय भव्य राम कथा आयोजन का प्रेरणास्थान नागपुर रोड स्थित श्री लखमापुर हनुमान मंदिर देवस्थान है। चन्द्रपुर जिले सहित दूसरे-दूसरे जिले के हजारों श्रद्धालुओं श्रीराम कथा सुनने आ रहे हैं। उदघोषक उमाशंकर ने मुख्य यजमान, यजमान व अन्य प्रतिष्ठितों को मंच पर बुलाकर सम्मानित करवाया।

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विशेष. प्रतिनिधी कामताकुमार सिंह






















