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वरोरा,(वि. प्र.) : शहर के इलाके में कुछ प्राइवेट स्कूलों से किताबें और नोटबुक के साथ-साथ स्कूल का सामान भी बेचा जा रहा है। अलग-अलग पब्लिकेशन की किताबें बेचते हुए, पेरेंट्स पर किताबों का पूरा सेट खरीदने का दबाव बनाकर उन्हें पैसे से लूटा जा रहा है।
इसी वजह से शिवसेना उभाठा के जिला संगठक और नगर परिषद के कंस्ट्रक्शन चेयरमैन मनीष जेठानी ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर स्कूल परिसर से किताबें, नोटबुक और दूसरा पढ़ाई का सामान और यूनिफॉर्म बेचने वाले स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
पढ़ाई करने वाली संस्थाएं कमर्शियल नहीं बल्कि समाज सेवा करने वाली संस्थाएं हैं। लेकिन हाल ही में कुछ प्राइवेट पढ़ाई वाली संस्थाओं ने बाजार लगाकर पढ़ाई का कमर्शियलाइजेशन शुरू कर दिया है।
वरोरा शहर के सेंट ऐनी पब्लिक स्कूल और हाई स्कूल के साथ-साथ संस्कार भारती पब्लिक स्कूल के परिसर में प्राइवेट तौर पर छपी किताबें, नोटबुक और दूसरा पढ़ाई का सामान और यूनिफॉर्म बाजार भाव से ज्यादा दामों पर बेची जा रही हैं। पेरेंट्स को ऐसा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है और उनका पैसे से शोषण किया जा रहा है।
सरकारी नियमों के मुताबिक, एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन के कैंपस से एजुकेशनल मटीरियल बेचना मना है, फिर भी स्कूल इस नियम को तोड़ रहे हैं। वरोरा शहर के सेंट ऐनी पब्लिक स्कूल, सेंट ऐनी हाई स्कूल और संस्कार भारती पब्लिक स्कूल जैसे स्कूलों के मैनेजमेंट की तरफ से यह काम कई सालों से चल रहा है।
ये स्कूल सालाना एग्जाम के बाद रिजल्ट वाले दिन किताबें और एजुकेशनल मटीरियल बेचने की कोशिश कर रहे हैं। बताया जाता है कि जो किताबें जबरदस्ती बेची जा रही हैं, उनमें से कई किताबें तो साल भर खुली भी नहीं होतीं। लेकिन कमीशन की मनमानी के चलते स्कूलों के ज़रिए स्टूडेंट्स को एजुकेशनल मटीरियल बेचकर पेरेंट्स को पैसे से लूटा जा रहा है।
इस बारे में कई पेरेंट्स ने शिवसेना (उभाठा) के जिला संगठक और नगर परिषद के कंस्ट्रक्शन चेयरमैन मनीष जेठानी से शिकायत की है।
इस शिकायत पर संज्ञान लेते हुए मनीष जेठानी ने वरोरा पंचायत समिति के ग्रुप एजुकेशन ऑफिसर को एक रिप्रेजेंटेशन देकर मांग की है कि स्कूल कैंपस से नोटबुक, किताबें या दूसरे मटीरियल की बिक्री तुरंत रोकी जाए और इन स्कूलों के खिलाफ एक्शन लिया जाए।
इस बयान के ज़रिए उन्होंने कहा है कि स्कूल अगले सेशन में स्टूडेंट्स को जिन किताबों की ज़रूरत होगी, उनकी लिस्ट स्कूल के सामने लगाएँ या लिस्ट एजुकेशन डिपार्टमेंट को दे दें, और स्टूडेंट्स को एकेडमिक सेशन शुरू होने से दस दिन पहले तक किताबें खरीदने से छूट दी जाए।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी है कि अगर स्कूल कैंपस में किताबें या एजुकेशनल मटीरियल बिकते हुए पाए गए, तो वे विरोध करेंगे और किताबें ज़ब्त करके स्टूडेंट्स को मुफ़्त में बाँटेंगे।

























