=================================
*चंद्रपर रेलवे स्कूटर स्टैंड ठेकेदार की मनमानी, ले रहे मनमाना किराया और गाड़ियों की सुरक्षा भगवान भरोसे*
भारतीय रेलवें अपनी यात्रियों के सुविधा के लिए रेलवें स्टेशन पर स्कूटर स्टैंड बना कर रखा करती है। इससे उन यात्रियों को काफी सुविधा मिल जाता है जिन्होंने दोपहिया या चारपहिया वाहन से स्टेशन तक आये हैं। इससे रेलवें को कमाई और यात्रियों को गाड़ी रखने का सुविधा मिल जाता है। लेकिन जब स्कूटर स्टैंड का उटपटांग रेट और यात्रियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता है, तब उक्त सुविधा बेकार लगने लगता है।
15 घंटे का 80 रुपये चार्ज ============================== 5 दिसंबर को एक यात्री सुबह 5 बजकर 50 मिनट पर रेलवें स्कूटर स्टैंड चंद्रपुर में अपनी बाइक रखी। तब उनसे 40 रुपये रक्कम पहले जमा करवाया गया। शाम को 8 बजकर 30 मिनट पर लगभग 15 घंटे बाद जब अपनी बाइक लेने आये तो उनसे 40 रुपये और माँगा गया। उनसे कहा गया कि 12 घंटे के बाद पंद्रह मिनट भी ज्यादा हो जाता है तो 24 घंटे का चार्ज 80 रुपये लगता है। मजबूरन उन्हें 80 रुपए देना पड़ा। लेकिन उसके बाद 80 रुपये के रशीद मांगी गई तो देने से इनकार कर दिया गया। जैसे तैसे कर उस कूपन को वापस किया गया जब गाड़ी जमा करते समय दिया गया था। ============================= कूपन में झोल और गोलमोल =========================== गाड़ी जमा करते समय जो कूपन दी जाती है, उसमें लिखा हुआ रेट और नियम में बेहद झोल है और गोलमोल है। इससे रेलवें की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है। केंद्र सरकार के बेहद प्रगतिशील विभाग रेलवें के स्कूटर स्टैंड का रेट- 12 से 24 घंटे के लिए 80 रुपए उसके बाद प्रत्येक दिन के लिए 300 रूपये चार्ज एक मोटरसाइकिल के लिए किसी भी दृष्टिकोण से सही नहीं लगता है। किसी कारणबस 10 दिनों तक मोटरसाइकिल खड़ी रह गई तो स्कूटर स्टैंड वाले को 3000 रुपये बतौर चार्ज देना पड़ेगा। आदमियों के रहने वाले एक लॉज के बराबर का चार्ज, धूल उड़ने वाले चंद्रपुर स्कूटर स्टैंड में मोटरसाइकिल रखने पर देना पड़ेगा। ============================== जिम्मेवारी में भी पीछे ============================= जब एक बार मोटरसाइकिल स्टैंड पर अपनी बाइक खड़ी हो गई तो उसके बाद की सारी जिम्मेवारी स्कूटर स्टैंड के ऊपर हो जानी चाहिए। चंद्रपुर रेलवें स्टैंड के संचालक उक्त जिम्मेवारी लेने से इनकार करती है। रेलवें ने कूपन में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि गाड़ी के पार्ट्स और सामान की जिम्मेदारी नहीं रहेंगी। स्कूटर स्टैंड पर गाड़ी का पार्ट्स किसी ने निकाल लिया तो इसकी जिम्मेदारी रेलवें नहीं लेंगी तो फिर कौन लेगा? ============================== पैसा मनमाना, जिम्मेवारी शून्य
गाड़ी रखने का समय और गाड़ी ले जाने का समय दोनों अच्छी तरह कूपन में उल्लेख होना चाहिए। जबकि कूपन में गाड़ी रखने के कॉलम में तारीख लिखा है और गाड़ी ले जाने के समय के कॉलम में बाइक रखने का समय लिखा हुआ है। ऐसी स्थिति में गाड़ी चोरी ही जाएगी तो क्लेम देंगे, यह भी संदेह के घेरे में नजर आता है। सभी प्रकार से उटपटांग, गैर जिम्मेदाराना, गैर सुरक्षात्मक स्थिति को देखते हुए रेलवें विभाग को चाहिए कि यथाशीघ्र सुधारने का काम करे, ============================== *”हँलो चांदा न्यूज “, करिता जिल्हा प्रतिनिधी, राजूरा ,व गढ़चांदूर, वरोरा तालुका प्रतिनिधींची नियुक्ती करणे आहे. इच्छुक प्रतिनिधीने संपर्क साधावा.* ============================= कार्यकारी संपादक :शशिकांत मोकाशे
*संपादक:- शशि ठक्कर, 9881277793, 9022199356*
*उपसंपादक:- विनोद येमलाल शर्मा, वरोरा। 9422168069*






















