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चंद्रपूर,(वि. प्र.) – दुर्गापुर वेकोलि भटाली का 11 मार्च की आधी रात के हुए दुर्घटना में भले ही जान हानि नहीं हुई, लेकिन उक्त दुर्घटना ने वेकोलि मुख्यालय, कोल इंडिया मुख्यालय, भारत सरकार की सुरक्षा संबंधित विभाग डी जी एम एस सहित तमाम सभी विभाग के दावे को झुठला दिया है कि खदानों में तय मानक अनुसार काम होता है।
दुर्घटना के बाद से संबंधित विभाग की बड़े शहरों के बड़े अधिकारियों को खादान परिसर में आना जाना लगा रहा। यूँ कहे कि युद्धस्तर पर जांच हुई। लेकिन अबतक नतीजा कुछ भी नहीं निकला। ऐसा लग रहा है कि एक दूसरे को बचाने में लगे हुए हैं।
अन्यथा उपक्षेत्रीय प्रबंधक धोबले और खान प्रबंधक नेवारे के ऊपर अबतक कार्रवाई हो चुका रहता। खादान में काम करने वाले वेकोलि कर्मियों पिछले दो महीने से दुर्घटना के आशंका जता रहे थे। बावजूद दोनों अधिकारी जिद पकड़कर काम करवा रहे थे। ऐसे में स्पष्ट हो रहा है कि दोनों अधिकारी दोषी है।
डीजीएमएस ने सेक्सन 22 लगाया
भारत सरकार की खदानों से संबंधित सुरक्षा देखने वाली एजेंसी डीजीएमएस ने दुर्घटना स्थल के आस-पास सेक्सन 22 लगा दिया है। इसका मतलब यह हुआ कि जबतक डीजीएमएस से अनुमति नहीं मिलेगी, वहां पर कोयला नहीं निकाला जा सकेगा। लेकिन यह कोई सजा नहीं है।
126000 टन कोयला
जिस जगह पर शिल्ट गिरा है, उसके अंदर एक लाख छब्बीस हजार टन कोयला दबा हुआ है। जिसे आज या कल कोयला निकालना ही होगा, अन्यथा हमेशा के लिए दबा रह जाएगा। इसके लिए पहले शिल्ट निकालना पड़ेगा। शिल्ट निकालने के लिए अभी वेकोलि के पास शक्तिशाली कोई मशीन नहीं है। वेकोलि द्वारा 4 करोड़ की कीमत का शिल्ट निकालने वाला मशीन खरीदी करने की चर्चाएं हो रही है।
खानापूर्ति वाली जांच
सूत्र बताते हैं कि हर दुर्घटना के बाद सप्ताह दो सप्ताह तक खानापूर्ति वाली जांच होती है। लेकिन कार्रवाई नगण्य ही रहता है। इसमें भी यही होते दिख रहा है। इस बार की दुर्घटना में स्पष्ट दिख रहा है कि किसकी गलती से दुर्घटना हुआ है।
संबंधित कर्मचारियों ने उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक को दो महीने से बता रहे थें कि जहाँ से कोयले निकाले जा रहे हैं उसके ऊपर के शिल्ट को पहले हटाया जाए। लेकिन उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खान प्रबंधक ने पावर के जोर पर जबरदस्ती काम करवा रहे थें। नतीजा सब के सामने है।
वेकोलि के एक अधिकारी व तीन कर्मचारियों मौत के मुँह से निकले हैं।
पदमापुर खदान में 8 वर्ष पहले वेकोलि प्रबंधकों ने मनमानी किया था। नतीजा मलबा इतना ज्यादा खदान में गिरा था कि जान माल की हानि हुई थी। उच्चस्तरीय जाँच हुई और देर सबेर खदान बन्द कर दिया गया, लेकिन कोई भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुआ।
सेफ्टी ऑफिसर का स्थानांतरण
सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार इस बीच एक खबर प्राप्त हुआ है कि वेकोलि खदान के सेफ्टी ऑफिसर अजित कुमार का वेकोलि मुख्यालय के आदेश पर जी एम ऑफिस चन्द्रपुर में स्थानांतरित किया गया है।
लेकिन सब एरिया मैनेजर ने उन्हें अभी रिलीज नहीं किया है।
भटाली खदान के सब एरिया मैनेजर धोबले से मोबाइल से संपर्क कर जब यह पूछा गया कि कर्मचारियों द्वारा दुर्घटना हो सकने की संभावनाए बताए जाने के बाद भी काम क्यों जारी रखा गया तो उन्होंने कहा कि जांच में सब सामने आ जाएगा। इसके बाद मोबाइल डिस्कनेक्ट कर दिया था।
पिछले शनिवार को पुनः एक बार मोबाइल से संपर्क होने पर जब उनसे पूछा गया कि तीन सप्ताह से चली इंक्वायरी का क्या हुआ तो उनका जवाब था कि अभी भी इंक्वायरी चल रहा है।
सेफ्टी ऑफिसर अजित कुमार का स्थानांतरण के संबंध में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि यह अंदुरूनी मामला है।
विशेष प्रतिनिधी कामताकुमार सिंह.
























