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चंद्रपूर,(वि.प्र.) कंस के कारागार में भगवान श्रीकृष्ण का पागट्य हुआ। वसुदेवजी ने बाल कृष्ण को गोकुल पहूंचाने के लिए मस्तक पर धारण किया वैसे ही उनकी बेडीयां टुट गयी और बंद दरवाजे खुल गये।इस का अर्थ है,भगवान श्रीकृष्ण को चित्त मन बुद्धि में धारण करने से जीवन की समस्त रुकावटें अंध:कार मिट जाता है।
जीवन की समस्याओं का समाधान प्राप्त होजाता है । ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यास ने प्रतिपादित किये।
पुष्टिमार्ग के धर्माचार्य गोस्वामी श्री द्रुमिलकुमारजी महोदयश्री की आज्ञा से श्रीराम नवमी से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में मुरलीमनोहर व्यास व्यास पिठ पर विराजमान होकर श्री गोवर्धननाथजी के सुखार्थ श्रीमद् भागवत कथा का रसपान करा रहे थे। पं पवन व्यास और पं नवल काकडा ने भागवतजी का पूजन करवाया।
व्यास ने कहा श्रीमद् भागवत कथा में गुढज्ञान है, तत्वज्ञान है , जवन दर्शन है। इसे समझना आवश्यक है।
वसुदेवजी ने बाल कृष्ण को मस्तक पर धारण करते ही बेडीयां टुट गयी और बालकृष्ण को गोकुल में छोड कर योगमाया को मस्तक पर धारण करने के बाद कारागृह के दरवाजे बंद होकर बेडीयां वापस लग गई। इस का अर्थ है भगवान को छोड कर भगवान की माया अर्थात सांसारिक कामनायें, धन दौलत, मोह माया की जंजीरों में, बेडियों में मनुष्य बंध जाता है। इस से मुक्त होने का एक ही उपाय है अपने आराध्य में मन लगाकर भक्ति करना।
भागवत कथा संसार छोडने की बात नही करती अपितु संसार में रहते हुये अपना मन भगवान में लगाने की शिक्षा देती है।
जिससे मन शांत होकर चित्त में आनंद की अनुभूती होती है।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली ट्रस्ट मंडल चंद्रपुर के पदाधिकारीगण तथा मनोरथीगण सौ निता रमेश शाह परिवार, राजेश विराणी, राजू पुरोहित, हेमंत सूचक, भूपेंद्र व्यास, अतुल रायकुंडलिया, अधिवक्ता दीलिप राठी, मुकुंद गांधी, गोपाल विराणी, राजू सादराणी,सौ ममता ताराचंद काबरा, सुभाष सादराणी, नटवर ढोलकिया आदिने सुन्दर आयोजन किया। मोहित व्यास, नयना व्यास, सलोनी व्यास,सौ अल्का विराणी, सौ वखारिया आदिने कथा की विविध व्यवस्थाओं का संयोजन किया।
























