चारों पुत्र चारों वेदों के सारांश है।
लूटने से ज्यादा लुटाने में आनंद आता है।
चंद्रपुर,(वि. प्र.) – श्रीराम कथा का चौथा दिन बाललीला प्रसंग पर प्रसिद्ध कथाकार राजन महाराज ने श्लोक गाकर प्रारंभ किया। भव्य मंच जिस पर रामदरबार, शंकर दरबार और श्रीहनुमान जी का मंदिर और बेहतरीन फोटो से सजा व्यासपीठ से महाराज रामकथा के साथ ही अनेकों भजन और सोहर गीत गाया, जिसपर श्रद्धालुओं खूब झूमें।
जिनके आने पर खुशी का लहर बहने लगे तो समझ जाइए कि आने वाले विशिष्ट व्यक्ति है। राजा दशरथ के घर श्री राम सहित चार बच्चे के अवतरण पर पूरे अयोध्या नगरी में खुशी की लहर बहने लगी। पेड़ पौधें नदी-नाले सभी अपने-अपने तरीके से खुशियां मना रहे थे। चारों भाइयों के अवतार के पश्चात जो सुख मिला ऐसा सुख और कहीं नहीं मिल सकता था। देवी- देवताओं भेष बदलकर अयोध्या में राम लला के अवतरण पर खुशियों में शामिल हुए। सूर्य भी ठहरकर श्रीराम अवतरण के बधाई गीत सुनने में ऐसे लीन हो गए कि एक महिना तक दिन ही दिन बना रहा। श्रीदशरथ के चारों पुत्र चारों वेदों के सारांश है। चारों भाइयों थोड़े बड़े हुए तो बाहर खेलने निकलने लगे। जो भी उन्हें देखते सहज ही गुनगुनाने लगते। तेरे मंद मंद मुस्कनिया पर बलिहार राघव जी, तेरे बाल बड़े घुघराले जैसे बादल हो काले काले। भजन गाया गया तो श्रद्धालुओं ऐसे खुशियों से झूम उठें जैसे इस भजन का बेसब्री से इंतजार था।
अनुभव अनुभूति के लिए होता है, बताने के लिए नहीं। यह छापने के लिए नहीं, छिपाने के लिए होता है। अर्थ के साथ परमार्थ जमा करते रहिए। अर्थ छूट जाएगा परन्तु परमार्थ साथ जाएगा। जिंदगी में जो आनंद लूटने में आता है उससे ज्यादा आनंद लुटाने में आता है। जीवन के विपरीत परिस्थितियों में जो राम का नाम लेता है उसे विश्राम कहते हैं। जो माया जगत को फंसा रखी है, वह माया सिर्फ राम से डरती है। मन कर्म वचन से चतुराई छोड़कर भगवान के भजन करेंगे तो भागवत कृपा होगी।
गुरुकुल से पढ़कर जब श्रीराम आये थे तब उनकी उम्र 12 वर्ष की थी। तब 17 वर्ष का आदिवासी समाज का बालयुवक गुह्यराज ने उनसे मिलने के लिए प्रयासरत थे। रामजी के नजर उनपर पड़ी तो उन्हें बुलाये। उन्हें मित्र कहा और अपने बगल में बैठाए।
ताड़का का वध
राजन महाराज ने श्रीराम कथा में बताया कि बिहार स्थित बक्सर में महर्षि विश्वामित्र जी का आश्रम था। वे जब भी यज्ञ करते थे कि राक्षसों ने तोड़ फोड़ कर दिया करता था। विश्वामित्र जी को पता था कि अयोध्या में श्रीराम के रूप में भगवान का अवतार हो चुका है। वे राम लक्ष्मण को लाने के उधेश्य से अयोध्या में राजा दशरथ के यहाँ पहुंचे। काफी मन मनोव्वल और तर्क संगत उक्ति पश्चात महाराज दशरथ ने अपने दोनों बालकों को महर्षि विश्वामित्र के साथ दोनों बालकों को जाने की अनुमति दी। महर्षि ने राम लक्ष्मण को यज्ञ स्थान पर लाये जहाँ राक्षसनी तारका का वध किया गया। मारीचि को 100 योजन दूर समुंदर पर फेक दिया गया। बाकी राक्षस भी मारे गए उसके बाद यज्ञ परिपूर्ण हुआ।
श्रीराम कथा सुनने जो भी एक बार राम कथा पंडाल में आ जा रहे हैं वे कथा वाचक राजन महाराज के कथा शैली से प्रभावित होकर हर दिन आ रहें हैं। श्रद्धालुओं का प्रतिक्रिया है कि कब कथा का तीन घंटे बीत जाते हैं, पता ही नहीं चलता है।
श्री राम कथा में चंद्रपुर शहर और जिले सहित गडचिरोली, नागपुर, वर्धा, रायपुर सहित कुछ श्रद्धालुओं रांची से भी कथा का रसपान करने आये हैं। सभी सकल समाज श्री राम कथा में सहयोग कर रहे हैं। श्रीराम कथा के अंत में जब आरती होता है तो उसमें पांच अलग-अलग समाज के लोंगो को विशेष रूप से आमंत्रित किया जाता है।


























