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चंद्रपूर,(वि. प्र.) : हर व्यक्ति के शरिर में विद्युत और चुंबकिय शक्ति होती है। व्यक्ति के कर्मों और विचारों के संस्कार उसके निवास स्थान और प्रयोग में की जानेवाली वस्तुओं पर पडते है और समय आनेपर उन वस्तुओं का उपयोग करनेवाले अन्य व्यक्तियों पर भी पडकर उनके विचार प्रदुषित हो जाते है। राजा परिक्षीत ने जरासंघ का मुकूट पहनते ही दयालु राजा के विचार बिगड गये, शिकार खेलने के विचार आया।
अत: हमने हर समय सावधान रहना चाहिए ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यास ने प्रतिपादित किये।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ में मुरलीमनोहर व्यास बोल रहे थे।
श्रीराम नवमी से प्रारंभ श्रीमद् भागवत कथा के तृतिय दिवस के मनोरथी अधिवक्ता राजेश विराणी सौ अल्का विराणी तथा मुख्य मनोरथी सौ निता रमेश शाह परिवार ने भागवतजी तथा श्री गणेशजी एवं देवताओं का पूजन किया।
व्यास ने कहा मानव शरिर को भुख, प्यास आदि आवेगों के समय पर अक्सर क्रोध आता है अत: अपने आप पर, अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए। राजा परिक्षीत शिकार खेलने गया तब उन्हें प्यास लगी पानी मांगा लेकिन ध्यानस्थ ऋषि को आवाज़ सुनाई नही दी । राजा को क्रोध आया और राजा ने ऋषि को अपमानित कर मरा सर्प गले में डाला। ऋषि के पुत्र श्रृंग को यह समाचार प्राप्त होते ही उसने श्राप दिया कि, जिसने यह कार्य किया है उसकी आज से सातवें दिन तक्षक सर्प के काटने से मृत्यु होंगी। इसका तात्विक अर्थ है कि, हम सभी प्राणीयों की मृत्यु सप्ताहके सात दिनों में ही होनी है।
राजा परिक्षीत ने अपना मन भगवान श्रीकृष्ण में लगाया हमने भी अपने आराध्य में मन लगाना चाहिए।
भागवत कथा का सुंदर आयोजन श्री गोवर्धननाथ हवेली ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारि तथा मनोरथीगण नटवर ढोलकिया, गोपाल विराणी, राजू पुरोहित, राजेश सादराणी, हेमंत सूचक , जितेंद्र दोषी, नरेंद्र सोनी, मुख्यमनोरथी सौ निता रमेश शाह परिवार, भुपेंद्रकुमार व्यास,राजेश विराणी, राजू सादराणी, मुकुंद गांधी, अतुल रायकुंडलिया, अधिवक्ता दीलिप राठी,सुभाष सादराणी, सौ ममता ताराचंद काबरा ने किया।

























