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चंद्रपूर,(वि. प्र.) : व्यक्ति के पास भरपूर ज्ञान हो लेकिन प्रेमा भक्ति नही हो तो उसके जीवन में आनंद नही होता। अत: जीवन में ज्ञान के साथ भक्ति भी होना आवश्यक है। वेद व्यासजी ने वेदों का पृथ:करण किया, उपनिषद लिखे, सत्रह पुराण लिखे फिर भी आनंदित नही थे, यह देखकर नारदजी ने उन्हें श्रीकृष्ण भक्ति की मधुर लिलाओं का गान करनेवाली श्रीमद् भागवत कथा लिखने के लिए प्रेरणा प्रदान की। ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार, भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यास ने व्यक्त किये।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर के रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष्यमें श्रीराम नवमी से आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के व्यासपीठ से श्री मुरली मनोहर व्यास श्री गोवर्धननाथ प्रभु के समक्ष श्रीमद् भागवत कथा का रसामृत प्रदान कर रहे हैं।
कथा के दैनिक मनोरथी अधिवक्ता राजेश विराणी सौ अल्का विराणी तथा मुख्यमनोरथी सौ निता रमेश शाह परिवार ने भागवतजी का पूजन किया।
व्यास ने कथामृत का पान कराते हुये कहा, देवर्षि नारदजी ने वेदव्यासजी को श्रीकृष्ण भक्ति की महिमा समझाते हुये अपने पूर्व जन्मों के वृत्तांत बतलाते हुये कहा, एक पूर्व जन्म में मै दासी पुत्र था। लेकिन साधु-संतों के सत्संग में रहने से भक्ति-भाव बढा और फिर अगले मन्वंतर में ब्रह्माजी का पुत्र देवर्षि नारद बना।
व्यास ने कहा हम सभी पर भगवान की असीम कृपा है कि, हमें कर्मभूमि, देवभूमि, भारत में मनुष्य जन्म प्राप्त हुआ है। सभी धर्मों का कहना है, मानव जन्म भगवान की भक्ति कर भगवान का परमधाम प्राप्त करने के लिए है। हम सभी अपने -अपने आराध्य भगवान के स्वरुपों की भक्ति करके अपना जन्म सुफल करें।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारि तथा मनोरथीगण नटवर ढोलकिया, गोपाल विराणी, राजू पुरोहित, हेमंत सूचक, जितेंद्र दोषी, नरेंद्र सोनी, राजेश सादराणी परिवार , सौ निता रमेश शाह परिवार,राजेश विराणी, भुपेन्द्र व्यास, अतुल रायकुंडलिया, अधिवक्ता दीलिप राठी, मुकुंद गांधी,सौ ममता ताराचंद काबरा, आदि ने आयोजन किया।
मोहित व्यास और नयना एवं सलोनी व्यास, अल्का विराणी ने संयोजन किया। पं नवल काकडा ने पूजन करवाया।
























