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चंद्रपूर,(वि. प्र.) : मनुष्य के मन की आसक्ती बडी विचित्र है। राजा भरतने अपनी अनुपम सुंदर पत्नी तथा अपने विशाल साम्राज का त्याग कर दिया ।
तपस्वी साधु बन गये लेकिन एक हरीण के मोह में आसक्त हो गये। उस हरीण का चिंतन करते हुये देह त्यागा।परिणामत: दुसरे जन्म में हरीण बने।
भागवत कथा कहती है मरते समय जीव जिस का चिंतन करता है, उसी योनी में जन्म लेता है।
अत: मरते समय भगवान का ही चिंतन होना चाहिए इसके लिए बाल्यावस्था से ही भगवद् भक्ति के संस्कार होने चाहिए ऐसे विचार चंद्रपुर के आध्यात्मिक चिंतक तथा साहित्यकार भागवताचार्य मुरलीमनोहर व्यासजी ने प्रतिपादित किये।
श्री गोवर्धननाथजी हवेली चंद्रपुर के रजत जयंती के उपलक्ष्यमें गुरुवार दि 26 मार्च श्रीराम नवमी से 2 अप्रैल हनुमान जयंती तक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन किया गया है। व्यासपिठ पर श्री मुरलीमनोहर व्यासजी विराजमान होकर भगवान श्री गोवर्धननाथ प्रभु के सुखार्थ श्रीमद् भागवतजी का यशोगान कर रहे हैं।
व्यासजी ने कहा जिसके जीवन में हरि नही वह हरीण बन गया।
श्रीमद् भागवतजी में भगवान के विविध अवतारों के प्रागट्य के लिए गूढ कारण है। हर अवतार का रहस्य है। सभी अवतारों के बाद भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण की कथा है।
जब जीव जीवन में मर्यादा का मर्म आत्मसात करेंगा तभी पुर्णपुरुषोंत्तम भगवान श्रीकृष्ण अवतिर्ण होंगे। ऐसा भागवत कथा का चिंतन है।
श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का आयोजन श्री गोवर्धननाथ हवेली ट्रस्ट मंडल के पदाधिकारि नटवर ढोलकिया, गोपाल विराणी, राजू पुरोहित, हेमंत सूचक, जितेंद्र दोषी, नरेंद्र सोनी, राजेश विराणी, राजू सादराणी तथा मनोरथी सौ निताबेन रमेश शाह परिवार, राजेश विराणी, सौ ममता ताराचंद काबरा, सुभाष सादराणी, हेमंतभाई सूचक, भूपेंद्र व्यास, अतुल रायकुंडलिया, अधिवक्ता दिलीप राठी, मुकुंद गांधी, गोपाल विराणी ने किया है।
समस्त आयोजक मंडल ने भगवद् भक्तों से इस दिव्य कथा श्रवण का लाभ लेने का आवाहन किया है।
























